हिंदुस्तान जिंक की बायोडावर्सिटी पहल से 4.1 लाख से अधिक पशु एवं वन्यजीव लाभान्वित

BY — May 21, 2026

उदयपुर के बाघदड़ा मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व में वन्यजीवों को सुरक्षित माहौल के लिए कायाकल्प
आईयूसीएन के साथ मिलकर हिंदुस्तान जिंक राजस्थान में पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से काम कर रही है।

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी जिंक उत्पादक कंपनियों में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौके पर पर्यावरण और पशु देखभाल के लिए किए जा रहे अपने प्रयासों की जानकारी साझा की। कंपनी ने द्वारा सामुदायिक योजना समाधान के तहत राजस्थान में 4.1 लाख से अधिक पशुधन लाभान्वित हुआ है। कंपनी गाँवों में पशुओं के उपचार, उनके लिए पानी की व्यवस्था, जंगलों व पर्यावरण को सुधारने और वैज्ञानिक तरीकों से जीव-जंतुओं को बचाने का काम कर रही है। इसी के तहत उदयपुर के 369 हेक्टेयर में फैले बाघदडा मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व को सुधारने का बड़ा काम शुरू किया गया है।

पशु स्वास्थ्य और आजीविका को बढ़ावा देने के उद्धेश्य से पिछले 10 सालों से हिंदुस्तान जिंक अपने संचालन क्षेत्र के आस-पास के गाँवों में पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन रही है। समाधान परियोजना के तहत पशुपालकों को मुफ्त इलाज, टीके और सही जानकारी दी जाती है। इससे ग्रामीण इलाकों में किसानों की कमाई बढ़ती है और पशु सेहतमंद रहते हैं। यह योजना किसानों को आधुनिक और सुरक्षित खेती सिखाने में भी मदद करती है। गर्मियों के मौसम में पशुओं के लिए गाँवों में पानी की टंकियाँ और बर्तन रखे जा रहे हैं। इसके साथ ही, रात के समय सड़कों पर होने वाले हादसों से आवारा पशुओं को बचाने के लिए उनके गले में रिफ्लेक्टिव कॉलर बाँधे जा रहे हैं, ताकि वे गाड़ियों की रोशनी में दूर से दिखाई दे सकें। हिंदुस्तान जिंक के सीइओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, हमारे लिए पर्यावरण और जीवों की देखभाल करना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारे काम का एक जरूरी हिस्सा है। हम प्रकृति को बचाने और गाँवों को खुशहाल बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। हम दुनिया के बेहतरीन नियमों का पालन करते हुए देश के विकास और पर्यावरण सुरक्षा में अपना योगदान दे रहे हैं।
हिंदुस्तान जिंक ने राजस्थान सरकार के साथ 5 करोड़ का एमओयू किया है। इसके तहत उदयपुर के बाघदरा मगरमच्छ रिजर्व को सुधारा जा रहा है। इस योजना में नए पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैं,पानी को रोकने के लिए चेक डैम और तालाब बनाए जा रहे हैं, यहाँ आने वाले सैलानियों के लिए पैदल चलने के रास्ते और बैठने की जगहें बनाई जा रही हैं। इस रिजर्व के पूरी तरह तैयार होने पर यहाँ मगरमच्छों के साथ-साथ 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों को सुरक्षित घर मिलेगा। हिंदुस्तान जिंक अंतरराष्ट्रीय संस्था आईयूसीएन के साथ मिलकर पयार्वरण सरंक्षण हेतु प्रयास कर रही है, कंपनी का लक्ष्य नो नेट लोस का है, यानी काम के दौरान प्रकृति को जो भी थोड़ा-बहुत असर पड़ता है, कंपनी पेड़ लगाकर एवं पर्यावरण सरंक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। यह प्रयास दिखाता है कि किस तरह एक बड़ी कंपनी उद्योगों को चलाने के साथ-साथ प्रकृति और बेजुबान जानवरों की रक्षा भी कर सकती है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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