गैंग्रीन और मल्टीड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया को हरा स्वस्थ होकर लौटीं घर
उदयपुऱ। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, डॉक्टरों की टीम की कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर, गंभीर फेफड़ों के संक्रमण, रेस्पिरेटरी फेलियर और कई अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित 53 वर्षीय महिला को पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 45 दिनों तक आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच एक लंबी जंग के बाद मौत के मुंह से बाहर निकालकर नया जीवन दिया। मरीज के सफल उपचार में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अतुल लुहाड़िया, थोरेसिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता, इंटेंसिविस्ट डॉ. चेतन गोयल,डॉ. इब्राहिम सहित रेस्पिरेटरी टीम के डॉ. निश्चय, डॉ. आमिर, डॉ. जल्पित, डॉ. गोविंद, डॉ. रितेश, डॉ. अंशुल, डॉ. साहिल, डॉ. अरविंद, डॉ. ऋचा, डॉ. अभय और डॉ. सुप्रिया तथा आईसीयू और चेस्ट वार्ड के समस्त नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दरअसल चित्तौड़गढ़ निवासी 53 वर्षीय महिला को अत्यधिक सांस फूलने, लगातार तेज खांसी और बलगम आने की गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। पेसिफिक हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ.अतुल लुहाड़िया और उनकी टीम ने मरीज की जांच की, तो स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। महिला के दोनों फेफड़ों में गंभीर रूप से निमोनिया फैल चुका था। इसके अलावा मरीज पहले से ही उच्च रक्तचाप और थायरॉयड जैसी समस्याओं से भी पीड़ित थीं, जिससे इलाज की चुनौती दोगुनी हो गई थी।
डॉ.अतुल लुहाड़िया ने बताया कि उपचार के दौरान डॉक्टरों के सामने एक और बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई। मरीज के हाथ के अंगूठे में अचानक रक्त का प्रवाह रुक गया, जिससे वहां गैंग्रीन जैसी घातक स्थिति पैदा हो गई। अगर समय पर कदम न उठाया जाता तो संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता था। ऐसे में तुरंत थोरेसिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता ने आपातकालीन स्थिति में मरीज की थ्रोम्बेक्टॉमी सर्जरी कर अंगूठे को बचाया। मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया। मरीज के फेफड़ों ने काम करना लगभग बंद कर दिया और सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया गया। लंबे समय तक वेंटिलेटर की आवश्यकता को देखते हुए डॉक्टरों ने ट्रेकियोस्टॉमी करने का बड़ा निर्णय लिया।
इलाज के दौरान कुछ संक्रमणों में मल्टीड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया पाए गए, जिनका कल्चर रिपोर्ट के अनुसार विशेष एंटीबायोटिक्स से उपचार किया गया। लगातार निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सकीय प्रयासों से मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। करीब 45 दिन तक आईसीयू में उपचार के बाद महिला के फेफड़े सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, ऑक्सीजन की निर्भरता पूरी तरह खत्म हो चुकी है और उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में समय पर सटीक निर्णय,एक बहु-विषयक विशेषज्ञ टीम का होना और बेहतरीन आईसीयू केयर ही मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित होती है। महिला की रिकवरी मेडिकल साइंस और हमारी टीम के सामूहिक प्रयासों की एक बड़ी जीत है।