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Tag: jain muni sukumalnandi

दूसरों का दर्द समझने वाला ही इंसान: सुकुमालनंदी

BY ADMIN • August 23, 2012

udaipur. मानव धर्म का अनुपालन करना ही मानवता है। दूसरों को दुखी देखकर जिसकी आंखें नहीं भीगे वह…

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आस्थावान धार्मिक व्यक्ति कभी हारता नहीं: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 22, 2012

उदयपुर। धर्म में वो शक्ति है जो समस्त विश्व के शत्रुओं को परास्त कर सकती है। जिस प्रकार…

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भूमि-भवन से अधिक आत्मा को चमकाने की जरूरत

BY ADMIN • August 17, 2012

उदयपुर। आचार्य सुकुमालनन्दी महाराज ने कहा कि आम व्यक्ति अपने भवनों,इमारतों, घरेां को तो चमका देते है लेकिन…

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समय की कीमत पहचानें : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • August 9, 2012

udaipur. समय का चक्र निरन्तर चलता रहता है, समय अपनी गति से प्रवाहमान हैं। इंसान  बचपन,जवानी व बुढ़ापा…

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सच्चा मित्र भगवान का रूप : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 5, 2012

udaipur. इस संसार में प्रत्येक जीव के कई मित्र होते हैं। यह अलग बात है कि कोई मित्र…

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त्योहार देते हैं एकता व नैतिकता की शिक्षा : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 3, 2012

udaipur. प्रत्येक त्यौहार वर्ष में एक बार ही आता है लेकिन वह हमारी जिन्दगी को संवारने के लिए…

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धर्म की रक्षा का पर्व है रक्षाबंधन : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • August 2, 2012

udaipur. रक्षाबंधन मात्र भाई-बहिन का ही पर्व नहीं है। देव-शास्त्र-गुरु के ऊपर कोई आपत्ति आए तो उनकी रक्षा…

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मन को मारें नहीं, समझाएं: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 1, 2012

udaipur. मन बहुत चंचल है। हम किसी के प्रति बुरा बर्ताव करते हैं तो सबसे पहले मन ही…

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कैशलोच वैराग्य का प्रतीक: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • July 29, 2012

उदयपुर। साधु की परीक्षा कैशलोच से हाती है। शरीर में कितना राग है, कितना वैराग्य है यह कैशलोच…

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त्यागी ही सदा सुखी : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • July 28, 2012

udaipur. इस संसार में सुखी कौन, इस यक्ष प्रश्र का समाधान हर कोई सोचता रहता है लेकिन कोई…

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