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आतंकवाद और नक्सलवाद में फर्क : कमल मुनि

| December 14, 2011 | 2 Comments

udaipur. जैन मुनि राष्ट्र  संत कमल मुनि कमलेश ने कहा कि आतंकवाद और नक्सलवाद में काफी फर्क है। नक्सलवाद यानी हमारे ही रूठे हुए भाई हैं जो यहां की व्यरवस्था से आक्रोशित होकर प्रदर्शन करते हैं और आतंकवाद जिसका कोई धर्म नहीं होता। वे बुधवार को से. 3 स्थित महावीर भवन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्हों ने कहा कि नक्सलवाद का अर्थ यानी यातना, प्रताड़ना से आक्रोशित लोग हैं। बंदूक से आक्रोश नहीं दबाया जा सकता। नक्सलवादियों को भी हिंसा छोड़कर लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव लड़कर आगे आएं और जनता में अपना आधार बनाएं। आज पांच हजार लोग सड़कों पर आ जाते हैं, इसका मतलब उनका जनाधार तो है।
आज आतंकवाद देश की सबसे बड़ी समस्याआ हो गई है। तुष्टिकरण की नीति आतंकवाद की जनक है। अगर पूर्व में जम्मू  कश्मीयर में रूबिया को नहीं छोड़ा जाता, कंधार मामले में आतंकवादियों को नहीं छोड़ा जाता तो आज यह स्थित नहीं होती। सेना का मनोबल मजबूत होता। उसी का परिणाम है कि आज संसद, अक्षरधाम, अयोध्याम पर हमले हुए।
उन्होंउने कहा कि हिंसा, आतंक और जुल्मा की विश्व  का कोई धर्म इजाजत नहीं देता। धर्मांधता का जब उन्माद सवार होता है तो व्य क्ति शैतान बन जाता है। सरकार इतने हमलों के बावजूद और कितने खूनी हमलों का इंतजार है जो उसके बाद बडे़ कदम उठाए जाएंगे। उन्हो ने कहा कि अमेरिका की गलत नीतियों ने आतंकवाद को पाला-पोसा और खड़ा किया। पाकिस्तान तो आतंकवाद का कारखाना है जिससे वार्ता कर उचित भावना का सम्मान करना चाहिए।
मुनि कमलेश करीब 50 हजार से अधिक किमी. की पदयात्रा कर चुके हैं।
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Category: News

Comments (2)

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  1. चेतन says:

    नक्सली भी अपनी बात कहने के लिए आतंक का सहारा लेते है इसलिए वो भी आतंकवाद ही है.

  2. dheeraj boda says:

    muniwar, samaj ke bahar rahkar samaj ke ander ki bato par vichar ? wese dudh kitna bhi paushtik ho phatne ke bad dahi kahlata hai dudh nahi or nahi vapas dudh ban sakta hai. ye to koi bhi samj jayega to aap kyu nahi?

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