ग्रहों की स्थितियों से बताई बीमारियां

BY — December 22, 2014

प्रथम राष्ट्रीय ज्योतिष एवं स्वास्थ्य सम्मेलन का समापन

221210उदयपुर। देव वरूण शोध संस्थान व सार्वजनिक प्रन्यास तथा गीतांजली यूनिवर्सिटी के तत्वावधान में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय ज्योतिष एवं स्वास्थ्य सम्मेलन 2014 के दूसरे दिन देश-विदेश से आए ज्‍योतिषियों ने ग्रहों की स्थितियों से घर में होने वाली बीमारियों की जानकारी दी।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास, बाल योगेश्वर तपोनिष्ठ शैलेन्द्र नाथ, संस्थापक महामृत्युंजय पीठ स्वामी सहजानन्द महाराज, रजिस्ट्रार कृषि विश्वविद्यालय एसएन लाठी तथा रजिस्ट्रार सुखाडिया विश्वविद्यालय आरपी शर्मा थे। वरिष्ठ महिला ज्योतिषी उत्तरा शर्मा व उमा दशोरा, प्रवीणा माथुर एवं कल्पना शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन के समापन सत्र का शुभारंभ किया।
221209आयोजन अध्यक्ष पं. निरंजन भटट ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का भाव अभिनन्दन करते हुए मानव मात्र को आपसी प्रेस बनाए रखने की अपील की। समापन सत्र में अतिथियों ने ज्योतिष स्मारिका तथा अशोक सोकल की पत्रिका राजयोग का विमोचन किया। रमेश भोजराज द्विवेदी ने जन्म कुण्डली में भावों एवं दशाओं से रोग पर विवेचन किया।
प्रयाग ओझा ने ज्योतिष के इतिहास के बारे में बताया। ओझा और बाबूलाल जोशी के पत्रावाचन की प्रस्तुति के लिए 501 रूपए का पुरस्कार दिया गया। बरेली के नितिन टंडन ने शरीर के पंचतत्व की व्याख्या करते हुए शरीर के रोगों का विवेचन किया। एके वर्मा ने भूगर्भीय स्ट्रेस एवं उत्पन्न होने वाले शरीर में रोग पर वार्ता दी। जियोपेथिक स्ट्रोस जोन-दुर्घटना स्थल होते है। जियोपेथिक स्ट्रेस अगर घर पर हो और वहां पलंग आता है तो व्यक्ति को कैंसर होता है। आबूरोड़ के ऋषिकेश शास्त्री ने थायराइड रोग पर ज्योतिष कारण व निवारण बताए। थायराइड मेष राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से वृषभ राशि के 10 डिग्री तक होता है। कुलदीप ने बताया राहु व केतु रोगों के कारण है। रोगों की दिशा दक्षिण-पूर्व मानी गई है। यदि घर का प्रवेश दक्षिण-पूर्व में हो तो रोगों की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने विभिन्न चक्रों का विवेचन किया। गुडगांव के नगेन्द्र बाला ने हृदय रेखा पर विवेचन करते हुए इससे उत्पन्न होने वाले रोगों के बारे में बताया। उन्होंने बातया ब्लड़ प्रेशर, हृदय रोग के लिए लहसून, अदरक व प्याज के एक चम्मच रस निकालकर चार पान के पते उसमें 2 व 3 शहद की बंदे डालर सेवन करें। प्रह्लाद राय काबरा ने हथेली एवं रोग विषय पर वार्ता प्रस्तुत की। इन्दोर के दिलीप ने अंक ज्योतिष द्वारा रोगों के बारे में बताया। इसके अतिरिक्त डॉ. अंजना गुप्ता, रश्मि चौधरी, सुनील, डॉ. उतरा शर्मा, आनन्द वरन्दानी, नन्द किशोर अग्रवाल, नितिन गोठी, अभिषेक जोशी, नगेन्द्र बाला, डॉ. नगेन्द्र, दिलीप, रत्ना मिश्रा, अरूणा कंसारा, राजेश श्रीवास्तव, पवन निशान्त, अजय पुण्डीर, प्रीति राजगोर इत्यादि ने अपने विचार रखे। सम्मेलन के आखिर सत्र में अतिथियों को स्मृति चिन्ह, उपरना व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मुख्य वक्ताओं को विशिष्ट ज्योतिष सम्मान से सम्मानित किया। इसके साथ ही प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। संचालन प्रतिभा ठाकुर, डॉ. एचएच वशिष्ठ तथा डॉ. भगवती शंकर व्यास ने किया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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