ओवरबर्डन से रेती बनाने में पर्यावरण अनुमति में बाधा दुखद: कटारिया

BY — April 22, 2018

तेलंगाना में बज़री से निजी क्षेत्र को नहीं मिलता है राजस्व

उदयपुर। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि मांइसों में पड़े ओवरबर्डन से रेती बनाने में पर्यावरण क्लीयरेंस को लेकर आ रही बाधा काफी दुखद है। देश के विकास में बजरी के विकल्प को लेकर आ रहे सुझावों पर पयार्वरण विभाग को विचार करना चाहिये।

वे माइनिंग इंजीनियर्स एसीसीएशन ऑफ इंडिया राजस्थान चेप्टर की ओर से खान एवं भू विज्ञान विभाग और सीटीएई के खान विभाग के सहयोग से रेत खनन पर समस्याएं और उसके विकल्प पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होेंने कहा कि बज़री निर्माता और एडं यूजर्स दोनों को देशहित में मिल बैठकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा। हमनें जेसीबी लगाकर अपनी नदियों का बेरहमी से दोहन कर दिया जिस कारण सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने भी इस समस्या के समाधान के लिये सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। बज़री उत्पादन पर प्रतिबन्ध के कारण रोजगार पर संकट खड़ा हो गया और देश का विकास रूक गया है। निर्माण लागत में वृद्धि हो गयी है। यह समस्या बहुत गंभीर है। इसके विकल्प का जल्दी से जल्दी उपयोग देश के विकास को आगे बढ़ाना होगा।
केन्द्रीय खान मंत्रालय के निदेशक प्रिथुल कुमार ने कहा कि राजस्थान मंे 56 मिलीयन टन रेती की आवश्यकता होती है और इसका पता लगाया जा रहा है कि इसके रिप्लेसमेन्ट से कितनी सेंड उपलब्ध हो रही और शेष बची हुई आवश्यकता में इसके विकल्प एम सेंड का उपयोग किया जाना चाहिये।
एमपीयूटी के कुलपति प्रो. उमाश्ंाकर शर्मा ने कहा कि खनन जिलेां में अपशिष्टांे के पहाड़ बने हुए है। उनका रेत निर्माण में उपयोग के लिये राज्य सरकार को अनुमति देनी चाहिये।
अध्यक्षता करते हुए माइंनिग इंजीनियर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूण कोठारी ने कटारिया से एसोसिएशन के लिये जमीन उपलब्ध करवानें की मांग की ताकि स्कील डवलपमेन्ट एवं मिनरल डवलपमेन्ट के कार्य सुचारू रूप से किये जा सकें।
आरपीएससी के पूर्व चेयरमेन जी.एस.टांक ने बताया कि पािर्टकल साईज को डिफाईन कर काम में लिया जाने वाला पदार्थ एम सेंड होता है। मलबे को क्रश कर उसको उपयोग में लिया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होेंने एम सेंड की तकनीकी जानकारी दी।
सीटीआई काॅलेज के डीन डाॅ. एस.एस.राठौड़ ने सेमिनार की दो दिन की जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान की इस ज्वलंत समस्या का समाधान शीघ्र निकाला जाना चाहिये। तेलंगाना राज्य में निर्माण कार्यो में 30 प्रतिशत एम सेंड का उपयोग किया जा रहा है। राजस्थान में मात्र 4-5 प्रतिशत बजरी का रिजनरेशन ही होता है क्योंकि यहंा पर वर्षाकाल के दौरान की नदियंा प्रवाहित होती है। प्रारम्भ में लक्ष्मणसिंह शेखावत ने कहा कि दक्षिण भारत में एम सेंड का काफी मात्रा में उपयोग किया जा रहा है। भारत में एम सेंड के प्रचार के लिये इस सेमिनार का आयोजन किया गया।
प्रस्ताव-संयुक्त आयोजन सचिव मधुसूदन पालीवाल ने बताया कि सेमिनार के दौरान आये प्रस्तावों पर सुझाव तैयार किये गये। एम सेंड के लिये अलग से नियम एवं नीति बनें,नदी नालों को उनके आकार के अनुसार वर्गीकृत किया जायें, छोटे नदी नालों से बजरी दोहन का अधिकार पंचायत को तथा बडे़ नदी नालों का दोहन आरएसएमएमलि. को दिया जायें,एम सेंड के संयंत्रों को कच्चा माल उपलब्ध कराने की नीति बनायी जायें, एम सेंड संयंत्रों को रियायत दर पर ओवर बर्डन उपलब्ध कराया जाना चाहिये।
तेलंगाना में बज़री से निजी क्षेत्र को नहीं मिलता है राजस्व-तेलंगाना के माइंस एण्ड जियोलोजी के अतिरिक्त निदेशक सी.नरसीमुलु ने बज़री खनन की रूपरेखा की मुख्य विशेषताएं विषय पर पत्रवाचन करते हुए कहा कि तेलंगाना में राज्य सरकार का बज़री खनन पर पूर्णतया नियंत्रण है। वहंा पर निजी क्षेत्र को बज़री पर किसी प्रकार का राजस्व नहीं मिलता है। वहंा पर राज्य सरकार ने नवाचार प्रोजेक्ट के तहत रेती को ग्राहक के घर पर पंहुचाया जाता है। वहंा पर रेती के बेचान में पूर्णतया पारदर्शिता रखी जाती है। हैदाराबाद के मेट्रो ट्रेन के कार्य में पूर्णतया मेन्यूफ्रेक्चर्ड सेन्ड काम में ली जा रही है।
भारतीय खान ब्यूरो के अभय अग्रवाल ने मेन्यूफ्रेक्चर्ड सेन्डःनदी बज़री का विकल्प विषय पर पत्रवाचन करते हुए मिनिस्ट्री आॅफ एन्वायरमेंट फोरेस्ट एण्ड क्लाईमेंट चेंज द्वारा बनायी गई सेन्ड माईनिंग गाईड लाईन-2016 की विवेचना की। आरएसएमएमएल के उप महाप्रबन्धक हरीश व्यास ने झामरकोटड़ा माइन्स के ओरवर बर्डन से मेन्यूफ्रेक्चर्ड सेन्ड बनाने की संभावनायें विषय पर अपना पत्र प्रस्तुत किया।
संगीता चैधरी व प्रेम चैधरी ने कोसना बजरी खनन का गणितिय माॅडल मिठरी नदी से सुरक्षित सीमा में प्रतिवर्ष बज़री खनन की जा सकें,विषय की विस्तृत व्याख्या की। वाई.सी.गुप्ता ने कहा कि क्या राजस्थान में ग्राहक को प्राकृतिक बजरी या मेन्यूफ्रेक्चर्ड बज़री भविष्य में वाजिब दाम पर उपलब्ध हो पायेगी। इसके लिये क्या कदम उठायें जानें चाहिये, विषय पर अपना पत्र प्रस्तुत किया।
राहुल इंजीनियर्स के मुख्य अधिशाषी अधिकारी ललित पानेरी ने निर्माण कार्य में उपयोग हेतु बजरी शब्दावली व विशिष्टतायें विषय पर वार्ता प्रस्तुत की।वन्डर सीमेन्ट लिमिअेड के अतिरिक्त उपाध्यक्ष महेन्द्र बोकड़िया ने मेन्यूफ्रेक्चर्ड बजरी प्राकृतिक बजरी का एक विकल्प विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इस सत्र की अध्यक्षता एमईआईए के कोन्सिल मेम्बर दिलीप सक्सेना ने की जबकि सह अध्यक्षता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने की।
सेमिनार हाॅल के बाहर राॅलजैक एशिया लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मेन्यूफ्रेक्चर्ड सेन्ड बनाने में काम वाली मशीन का डिस्प्ले कर उसके बारें में सेमिनार में आये सभी प्रतिभागियों को विस्तृत रूप से बताया।
इस अवसर पर कटारिया ने सेमिनार के सभी प्रायोजकों वन्डर सीमेन्ट लि.,हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड,पुजोलाना, यूएमडीएस प्रा.लि.,एएसडी,खेतान बिजनेस कोरपोरेशन,निरमेक्स सीमेन्ट, इण्डिया सीमेन्ट,आदित्य सीमेन्ट,प्रोपाइल इन्डस्ट्रीज,राॅलजेक एशिया लि.,ज्येाति मार्बल प्रा.लि, सूर्या एसोसिएट्स,मेवाड़ हाईटेक इंजीनियरिंग ,उदयपुर मेसेनरी स्टोन एण्ड मांइस ओनर्स को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन दीपक शर्मा ने किया। अंत में आर.डी.सक्सेना ने ज्ञापित किया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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