शुक्र मिशन व आदित्य मिशन की तैयारियां अंतिम चरणों में

BY — March 25, 2019

चंद्रयान दो भी भेजा जायेगा : डॉ भारद्वाज
उदयपुर “चंद्रयान एक “ व मंगल मिशन की सफलता के पश्चात भारत अब शुक्र के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान बनाने में जुटा है। यही नही सूर्य के विशेष अध्ययन के लिए ” आदित्य मिशन ” की तैयारियां भी अंतिम चरणों मे है। भारत चंद्रयान दो का प्रक्षेपण करने जा रहा है।
यह जानकारी भारतीय अंतरिक्ष विभाग की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री –पीआरएल )के निदेशक प्रसिद्ध अंतरिक्ष विज्ञानी डॉ अनिल भारद्वाज ने विद्या भवन ऑडिटोरियम में आयोजित विज्ञान संवाद में व्यक्त किये।

कार्यक्रम का आयोजन पी आर एल व विद्या भवन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। दिन भर चले कार्यक्रम में इस अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के एक दल ने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से माध्यमिक से स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े सिद्धान्तों व तथ्यों को प्रयोगों , प्रदर्शनी व् लघु फिल्मो के माध्यम से समझाया।
डॉ भारद्वाज ने कहा कि चंद्रयान दो चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों का विस्तृत अध्ययन करेगा । यंहा बर्फ एवं पानी का भंडार मिल सकता है। विश्व मे अभी तक कोई दूसरा देश चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रो तक नही पहुचा है। उन्होंने कहा कि पहले ही प्रयास में मंगल तक पंहुचने वाला भारत दुनिया का पहला देश है।
डॉ भारद्वाज ने बताया कि “आदित्य मिशन “सूर्य का बहुतरंगीय प्रेक्षण करेगा। यह भारत के अन्तरिक्ष अनुसन्धान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी । उन्होंने मंगल के वायुमंडल में उदासीन कणों का विश्लेषण करने के ” मेनका” नामक पेलोड पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ भारद्वाज इस पेलोड के प्रधान वैज्ञानिक थे।
उन्होंने कहा कि उदयपुर को सौर वैधशाला तथा माउंट आबू की इंफ्रारेड वैधशाला भारत के अन्तरिक्ष अनुसंधान के प्रमुख केंद्र है। माउंट आबू वैधशाला ने सौर मंडल के बाहर एक्सोप्लेनेटे की खोज कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है।
इस अवसर पर पीआरएल व् उदयपुर सौर वेधशाला के वैज्ञानिकों व् शोधकर्ताओं ने स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा का परस्पर रूपांतरण, अतिचालकता (सुपर कन्डक्टिविटी), दो द्रवों का सामान्य सतह पर स्थायित्व, तारों की स्थिति द्वारा समय की गणना, सूर्य घड़ी का सिद्धांत, ध्रुव तारे की स्थिति द्वारा अक्षांश की गणना जैसे कठिन व रोचक वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझाया ।
ऑडिटोरियम की क्षमता से दुगुनी संख्या में उपस्थित , यंहा तक की फर्श तक पर बैठे विद्यार्थियों को देख डॉ भारद्वाज ने कहा कि वे आश्वस्त है कि देश में आने वाले समय मे विश्वस्तरीय अंतरिक्ष विज्ञानी तैयार होंगे। डॉ भारद्वाज ने अंतरिक्ष विज्ञान में कैरियर संभावनाओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों ने उनके द्वारा तैयार चार्ट मोडल भी डॉ भारद्वाज को दिखाए।
खुले सत्र में डॉ रमित व डॉ भुवन ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्या भवन के अध्यक्ष अजय मेहता तथा मुख्य संचालक डॉ सूरज जेकब ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकास में वैज्ञानिकों के विधार्थियो से सीधे जुड़ाव को एक अहम कदम बताया।
इस अवसर पर उदयपुर सौर वैधशाला के उपनिदेशक डॉ नंदिता श्रीवास्तव तथा डॉ शिबू के मैथयू उपस्थित रहे ।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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