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हिंदुस्तान जिंक का प्रयास : 20 लाख से अधिक बालिकाओं और महिलाओं के सपनों को नई उड़ान

BY — October 10, 2026

शिक्षा, खेल और कौशल विकास के जरिए सानिया, सोनम और इंद्रा देवी जैसी बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, कंपनी की सामाजिक पहलों से लाभान्वित होने वालों में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं और बालिकाएं
उदयपुर। हर लड़की को केवल पढ़ाई का अवसर ही नहीं, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने और अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ हिंदुस्तान जिंक लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल और कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रहा है। कंपनी की विभिन्न सामाजिक पहलों से अब तक 20 लाख से अधिक बालिकाओं और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लड़कियों के उज्ज्वल भविष्य की पहली सीढ़ी बन सकती है। इसी उद्देश्य से हिंदुस्तान जिंक की शिक्षा संबल पहल सरकारी विद्यालयों के 47,000 से अधिक विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को मजबूत कर रही है। इस पहल से लाभान्वित विद्यार्थियों में लगभग 50 प्रतिशत बालिकाएं हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित आधारित शिक्षा तथा बेहतर शैक्षणिक संसाधनों के जरिए ग्रामीण बालिकाओं में तकनीकी विषयों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनके लिए नए करियर विकल्प खुल रहे हैं।
इसी दिशा में ऊंची उड़ान कार्यक्रम मेधावी विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्शन, कोचिंग और मेंटरशिप प्रदान कर रहा है। अब तक करीब 350 विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला है।


उत्तराखंड के हल्दी गांव की रहने वाली सानिया उरांव इसकी प्रेरणादायक उदाहरण हैं। सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाली सानिया ने ऊंची उड़ान कार्यक्रम से जुड़कर आईआईटी गुवाहाटी में इंजीनियरिंग में प्रवेश प्राप्त किया। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हिंदुस्तान जिंक के सहयोग से आज वह अपनी उच्च शिक्षा जारी रख रही हैं और छात्रवृत्ति का लाभ भी प्राप्त कर रही हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल के आरामबाग की सोनम घोष ने एक अलग सपना देखा। उन्होंने हिंदुस्तान जिंक की जिंक फुटबॉल अकादमी के पहले आवासीय बालिका कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी प्रतिभा को निखारा। पिछले एक वर्ष में उन्होंने उल्लेखनीय प्रगति की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने तक का सफर तय किया। उनकी उपलब्धि आज कई अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
जावर स्थित जिंक फुटबॉल अकादमी में बालिकाओं को खेल के साथ-साथ शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और समग्र विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें। हिंदुस्तान जिंक की सामुदायिक पहल सखी की उठोरी जागृति कलामंच बाल विवाह, लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता बढ़ाने का काम कर रही है। यह मंच ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाते हुए ऐसा माहौल तैयार कर रहा है, जहां बालिकाएं अपनी आवाज उठा सकें और अपने भविष्य से जुड़े फैसले आत्मविश्वास के साथ ले सकें।


राजस्थान के मूलजी का खेड़ा गांव की इंद्रा देवी इसका सशक्त उदाहरण हैं। इंद्रा देवी आज सखी उड़ान समिति की सचिव हैं और समुदाय में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैला रही हैं। उनका जीवन संघर्ष से सामाजिक बदलाव की दिशा में नेतृत्व तक का प्रेरणादायक सफर है।
स्कूल शिक्षा के बाद आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी हिंदुस्तान जिंक निरंतर कार्य कर रहा है। कंपनी की जिंक कौशल पहल युवाओं, विशेषकर बालिकाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। अब तक 12,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह पहल रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक अवसरों के नए रास्ते खोल रही है। हिंदुस्तान जिंक की विभिन्न सामाजिक पहलों का प्रभाव आज 4,100 से अधिक गांवों में रहने वाले 26 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच चुका है। कंपनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी लड़की की प्रतिभा उसके भौगोलिक स्थान, आर्थिक स्थिति या सामाजिक परिस्थितियों के कारण सीमित न हो।
आज ऐसी अनेक बेटियां हैं जो आत्मविश्वास के साथ कक्षा में सवाल पूछ रही हैं, प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश का सपना देख रही हैं, खेल मैदान में अपनी पहचान बना रही हैं और अपने भविष्य को स्वयं आकार दे रही हैं। क्योंकि जब एक लड़की को अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलता है, तो वह केवल अपना जीवन नहीं बदलती, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोलती है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.