विद्यापीठ में मीरा बाई अध्ययन शोध संस्थान की स्थापना

BY — July 27, 2015

एक करोड़ रूपये से बनेगी मीरा शोध संस्थान
वाइस चांसलर सारंगदेवोत ने दिए एक लाख रुपए

270703उदयपुर। भक्त शिरोमणि मीरा बाई के त्याग एवं बलिदान को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विद्यापीठ में मीरा बाई अध्ययन शोध संस्थान की स्थापना की जायेगी। यह घोषणा जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एचसी पारख की अध्यक्षता में सोमवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में हुई बैठक के बाद की गई।

उन्होंने बताया कि मीरा के त्याग, बलिदान, आदर्श एवं जीवनी पर रिसर्च एवं अन्तर्राष्ट्रीय सेमीनारों का आयोजन विद्यापीठ में जल्द, ही किया जायेगा। कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत ने बताया कि बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय किये गये जिसमें मीरा की जीवन एवं उनके चारित्रिक एवं बलिदान की गाथाओं की पुस्तक का प्रकाशन करना। उन्होने कहा कि मीराबाई हमारी आस्था एवं श्रद्धा का प्रतीक है। वे सम्पूर्ण नारी समाज का गौरव है। वे भक्ति एवं शक्ति की निर्मल धाराओं से युक्त पावन गंगा के समान है। ऐसी भक्तिमयी मीरॉबाई की पीठ की स्थापना कर हम अपने आप में गौरवांवित महसूस कर रहे है।
इतिहासविद् डॉ. देव कोठारी ने कहा कि मीरा के बिना मेवाड़ का इतिहास ही अधूरा है। उन्होंने कहा कि इस पर ओर अधिक कार्य करने की आवश्यकता है।  संयोजक एवं रजिस्ट्रार प्रो. सीपी अग्रवाल ने बताया कि यह विश्वविद्यालय का सौभाग्य है कि वह मेवाड़ की वीर शिरोमणी मीरा की जीवनी को आम जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास करेगी। बैठक में  इतिहासविद् प्रो. केएस गुप्ता, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश शेखावत, प्रो. कल्याण सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. सीपी अग्रवाल, डॉ. देव कोठारी, प्रो. जीएम मेहता, प्रो. नीलम कौशिक, डॉ. जीवनसिंह खरकवाल, डॉ. हरीश शर्मा, डॉ. हेमेन्द्र चौधरी ने भी विचार व्यक्त किए।
बनेगा मीरा संस्थान : कुलपति प्रो. सारंगदेवोत बताया कि मीरॉबाई अध्ययन शोध संस्थान में मीराबाई विभिन्न पहलुओं तथा अनछूए पहलुओं को खोजा जायेगा तथा इतिहास , साहित्यिक पक्ष, दार्शनिक पक्ष, सांस्कृतिक पक्ष पर शोध किया जायेगा व मीराबाई से जुड़े विभिन्न संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। इस हेतु एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी किया जायेगा। उन्होंने बताया कि मीराबाई के उपर किया गया पब्लिक वर्क एवं मेन स्क्रिप्ट की  सूची बनाई जाएगी तथा साथ ही उनकी जीवनी पर शोध, पदावली पर ज्यादा से ज्यादा कार्य किया जायेगा। इस हेतु विद्यापीठ परिसर में अलग से मीरा भवन बनेगा जिसमें नाट्यशाला, पुस्तकालय, शोध कक्ष, ऑडियो-विज्युाअल कक्ष तथा उन पर एक डाक्युमेन्ट्री फिल्म तथा वेबसाइट् भी बनाई जायेगी तथा राजस्थान में विद्यमान विभिन्न क्षेत्रों पर कार्य किया जायेगा।
एक करोड़ रूपये की राशि से बनेगा मीरा संस्थान : कुलपति प्रो. सारंगदेवोत बताया कि मीराबाई के संस्थान हेतु आम जन एवं समाजसेवीयों से धन संग्रह किया जायेगा। कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने इसकी शुरूआत करते हुए व्यक्तिगत तौर पर एक लाख रूपये देने की तत्काल घोषणा की।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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