नेशनल हेण्डलूम डे पर जिंक की इकाइयों में सखी उत्पादों की स्टाॅल

BY — August 7, 2021

खरीददारों को भायें ग्रामीण सखियों के बने डिजायनर वस्त्र और स्वादिष्ट उत्पाद
उदयपुर। नेशनल हेण्डलूम डे पर हिन्दुस्तान जिंक राजस्थान के 5 जिलों की 6 इकाइयों एवं प्रधान कार्यालय में 7 स्थानों पर सखी उत्पादों की स्टाॅल लगायी गयी। जिनसे आमजन, कर्मचारियों एवं उनके परिवारों ने खरीददारी की एवं सखी उत्पादों को सराहा।

नेशनल हेण्डलूम डे ष्वोकल फाॅर लोकल को बढ़ावा देता है जिनसे घरेलू उत्पादों और स्थानीय पहल को पुनर्जीवित करने में सहायता मिली है। हिन्दुस्तान जिंक का सखी कार्यक्रम महिलाओं को लघु उद्यमियों के रूप में पहचान दिलाने और उन्हें प्रशिक्षित कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र एवं सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्टाॅल में सखियों के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया जिनमें अचारए दालए मसालेए उनके द्वारा बनाएं गये डिजायनर वस्त्रएबेगए मास्क आदि उपलब्ध कराये गये जिन्हें विभिन्न जिलों में 250 महिलाओं द्वारा तैयार किया जाता है।
हिन्दुस्तान जिंक ने सखी अभियान से महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोडने का अनुकरणीय कार्य किया है। हिन्दुस्तान जिंक अपने सामाजिक सरोकार के तहत महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए विगत 14 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का स्वंय सहायता समूह बनाकर उनक रूचि एवं आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण देकर समाज में अपनी अलग ही पहचान दिलाने का अनुठा प्रयास कर रहा है। फलस्वरूप इस अभियान से जुडी महिलाओं में अदम्य विश्वास मुखरित हुआ है। आज वे आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक समृद्धि को निरंतर गति दे रही है।
सखी परियोजना विगत 5 वर्षो से हिन्दुस्तान ज़िंक द्वारा मंजरी फाउण्डेषन के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। जिसकें तहत् ग्रामीण महिलाओं को अभिप्रेरित करए स्वयं सहायता समुहों से जोडकरए अगले पायदान ग्राम संगठनए उससे भी परे सखी फेडरेषन से जोडकर सतत् आर्थिकए सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। वर्तमान में 27ए245 से अधिक महिलाएं 5 फैडरेशन और 194 ग्राम स्तर संगठनो से जुडी हुयी है।
हिन्दुस्तान जिंक के सखी अभियान से जुडकर स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बन चुकी सखी महिलाएं कोराना महामारी के बीच परिवार की आर्थिक स्थिति में कंधे से कंधा मिला कर सहयोग कर रही है। सिलाईं के प्रशिक्षण के बाद वर्तमान समय में मास्क का उत्पादन हो या शुद्ध मसालों का उत्पादन ये महिलाएं पिछे नहीं है। इन्हें गर्व है कि वे अपने कौशल के बलबूते पर परिवार की समृद्ध आर्थिक ईकाई के रूप में अलग पहचान बना रही है। जिले में सखी समूहों से जुडी महिलाओं ने उत्साह के साथ कहा कि जिंक के सखी अभियान से जुडकर आज वे सुखी और समृद्ध जीवन जीने के बुंलद हौसले के साथ परिवार का सहयोग कर रही है।
सखी द्वारा निर्मित उत्पाद आईएसओ प्रमाणित एवं बाजार में उपलब्ध
सखी उत्पादन समिति महिलाओं की रजिस्टर्ड संस्था है जिसे माइक्रोएस्माॅल एण्ड मिडियम एंटरप्रइजेज के तहत् जिला उद्योग केंद्र में पंजिकृत कराया गया है। सखी उत्पादन समिति आईएसओ 9001ः 2015 क्वालिटी मैनेजमंेट सिस्टम में मैन्यूफेक्चरिंग एण्ड मार्केटिंग आॅफ टेक्सटाईलएस्पाईस एवं पिकल के लिये प्रमाणित है। जिंक ने सखी समूहों की आय सृजन को प्राथमिकता समझते हुए सखी के उत्पादों को बेचने के लिए स्थानीय और राज्य स्तर पर बिक्री और बाजार से जोडा है ताकि सखी महिलाओं के बने उत्पाद सीधे बाजार में पहुंचे। सखी द्वारा निर्मित किए जा रहे विभिन्न उत्पाद अब बाजार में भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैए शुद्धता की गारंन्टी के साथ मसालेए अचारए दालें जैसे खाद्य उत्पाद और डिजाइनर वस्त्रए मास्क उपास और कटोरी ब्राण्ड से आॅनलाइन उपलब्ध है। जिनके उत्पादन से लेकर उन्हें गांव एवं शहरी क्षेत्र में विपणन के लिये सखी महिलाएं कार्य कर रही है।
स्टाॅल में कायड़ गांव की गुडिया कंवर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि लगन और मेहनत का जब परिणाम सामने आता है तो खुशी मिलती है जिसका श्रेय हिन्दुस्तान जिं़क को जाता है। अचार यूनिट को बडे कारखाने में बदलते देखने का सपना रखने वाली गुडिया कंवर अचार यूनिट की प्रभारी है और स्टाॅल पर लोगो द्वारा अलग अलग किस्म के अचार के स्वाद को पसंद करने से फुली नही समाती है। इसी तरह पुठोली गांव की जमना खटीक बताती है कि हिन्दुस्तान जिं़क की सखी परियोजना से जुडने के बाद अब वह मास्क, कुर्ती, बेग, प्लाजो, पिलो कवर और डांगरी सिलाई कर आत्म निर्भर है। समय समय पर स्टाॅल और अन्य प्रोत्साहन से उनके व उनकी साथीz महिलाओं द्वारा बनाये गये उत्पादों को बाजार में पहचान मिलती है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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