हिंदुस्तान जिंक और टाटा स्टील ने इकोजेन के साथ लो-कार्बन जिंक समाधान को बढ़ाने के लिए की पार्टनरशिप

BY — March 23, 2026

यह सहयोग स्टील और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन में क्लाइमेट के अनुसार मेटल सोर्सिंग को मजबूत करता है, इकोजेन पारंपरिक जिंक की तुलना में 75 प्रतिशत कम कार्बन इंटेंसिटी देता है, जिससे वैल्यू-चेन एमिशन कम होता है
उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक और टॉप पांच सिल्वर उत्पादक में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने टाटा स्टील के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और मजबूत किया है ताकि इंटीग्रेशन को सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरिंग में लो-कार्बन जिंक सॉल्यूशन इकोजेन, को बढ़ाया जा सके। यह सहयोग दोनों कंपनियों की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वे जलवायु संबंधी विचारों को अपनी मुख्य औद्योगिक प्रक्रियाओं और खरीद रणनीतियों में शामिल करना चाहती हैं। एशिया का पहला कम कार्बन वाला जिंक इकोजेन नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके उत्पादित किया जाता है। इसका सत्यापित कार्बन फुटप्रिंट प्रति टन जिंक पर 1 टन कार्बन उत्सर्जन के समान से भी कम है, जो वैश्विक उद्योग औसत से लगभग 75 प्रतिशत कम है। कच्चे माल के चरण में ही उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर इकोजेन आगे की डाउनस्ट्रीम उद्योगों को अपनी वैल्यू-चेन उत्सर्जन को सार्थक रूप से कम करने और अपने डीकार्बोनाइजेशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाता है।

हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, इकोजेन वैश्विक विनिर्माण की बदलती जरूरतों का समर्थन सस्टेनेबल समाधान के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। टाटा स्टील के साथ हमारी साझेदारी कम कार्बन वाले जिंक को अपनाने के पैमाने को बढ़ाने और भारत के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में हरित आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जंग से बचाने और उसकी सेवा-अवधि को बढ़ाने के लिए स्टील को गैल्वेनाइज करने में जिंक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि बुनियादी ढांचा, ऑटोमोटिव, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में यह आवश्यक है। चूंकि जिंक की कोटिंग गैल्वेनाइज्ड स्टील के अंतर्निहित कार्बन फुटप्रिंट में योगदान करती है, इसलिए कम कार्बन वाले जिंक का उपयोग करने से आगे की डाउनस्ट्रीम में मापने योग्य लाभ प्राप्त होते हैं। पारंपरिक जिंक की तुलना में, इकोजेन को अपनाने से प्रति टन गैल्वेनाइज्ड स्टील पर लगभग 400 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन को रोकने में मदद मिल सकती है। यह ग्राहकों को स्कोप 3 उत्सर्जन को कम करने का मार्ग प्रदान करता है, साथ ही उनकी समग्र सस्टेनेबल प्रदर्शन को भी मजबूत करता है।
इस सहयोग पर टाटा स्टील के चीफ प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, रंजन सिन्हा ने टाटा स्टील साहिबाबाद प्लांट में इकोजेन की डिलीवरी के लिए बधाई देते हुए कहा कि, हिंदुस्तान जिंक से यह सहयोग हमारे आपूर्तिकर्ता इको-सिस्टम के बीच सस्टनेबल प्रथाओं और हरित प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करता है। हिंदुस्तान जिंक दो दशकों से भी अधिक समय से टाटा स्टील का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है। इकोजेन पहल के तहत इस विस्तारित जुड़ाव ने इस सहयोग में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाया है, जिसमें दशकों की परिचालन उत्कृष्टता को डीकार्बोनाइजेशन, सस्टेनेबल तरिकों और जिम्मेदार सोर्सिंग पर सक्रिय फोकस के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे दोनों कंपनियाँ एक अधिक मजबूत स्टील मूल्य श्रृंखला में सबसे आगे खड़ी हैं।
इस सहयोग के माध्यम से, हिंदुस्तान जिंक और टाटा स्टील का उद्देश्य स्कोप 3 उत्सर्जन में कमी से लेकर जलवायु-अनुकूल खरीद ढांचों तक, व्यापक स्थिरता और जलवायु प्रतिबद्धताओं का समर्थन करना है, साथ ही भारत के कम-कार्बन, लचीले औद्योगिक विकास की ओर संक्रमण को आगे बढ़ाना है। यह साझेदारी इस बात को पुष्ट करती है कि कैसे रणनीतिक धातु नवाचार और दीर्घकालिक सहयोग, स्टील और धातु इको-सिस्टम में बड़े पैमाने पर जलवायु प्रभाव डाल सकते हैं।

Print Friendly, PDF & Email
admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *